जैसा कि आपको इससे पहले के एपिसोड के शो में दिखाया गया होगा कि मीत किस तरह से मंजरी बन कर अपनी बहन मानुषी से अपने बच्चे को वापस लेने का ड्रामा खेलती है । वह मंजरी बंद कर बहुत दिनों तक नाटक करती है और वह अपने खेल में कामयाब भी हो जाती है । मीत के ससुर राजवर्धन की तबीयत खराब होने के कारण मीत को या पूरे घर वालों के सामने बताना पड़ता है कि वह मंजरी ही नहीं बल्कि मीत हुड्डा है ।

मानुषी अपने स्वार्थ के कारण मंजिरी को मीत का बच्चा देने के लिए तैयार हो जाती है वाह मंजरी से कहती है कि शाम 4:00 बजे आज मैं तुम्हारी बुआ को बच्चा लाकर दे दूंगी मीत को या पूरा यकीन होता है कि यह बच्चा उसी का है और वह अपने बच्चे से मिलने के लिए बहुत बेताब हो रही है।
घरवालों को यह सच बताने के बाद कि वह मंजरी नहीं बल्कि मीत है वह मीत से मंजरी बनने के पीछे का सारा राज अपनी सास और अपने सब घर वालों से बताती है उसकी या दर्द भरी कहानी सुनकर घर के सभी सदस्य फूटकर रो पड़ते हैं। मीत की सास मीत का बहुत-बहुत धन्यवाद करती है और उससे माफी मांगती है मीत ने जिस बच्चे को जन्म दिया था भाई जिंदा है या सुनकर पूरे घरवाले खुशी से पागल हो जाते हैं और मीत को आशीर्वाद देती है कि वह जल्दी जाए और अपना बच्चा वापस लेकर आए सब लोग सोचते हैं कि मीत का बच्चा वापस आने के बाद घर में खुशियां आ जाएंगी ।

उधर ईसा की गाड़ी से दीप के टकरा जाने पर दीप की मौत हो जाती है यह सदमा मीत अलाहवत बर्दाश्त नहीं कर पाता है और टूट जाता है बिखर जाता है और समझ नहीं आता कि वह कहां जाए और किससे यह बताएं कि दीप अब इस दुनिया में नहीं रहा उसकी बहन का पति मर चुका है। पति अपनी मां के पास जाकर सारी सच्चाई बता देता है और दीप की मां खामोश हो जाती है पर जब उन्हें इस सच का पता चलता है कि उनके बेटे दीप की मौत की वजह मीत अलाहवत की बहन ईशा है तो वह क्रोध से पागल हो जाती है मीत अलाहवत बर्फी देवी से कहता है कि मैं आपके दीप की जगह तो नहीं ले सकता पर मैं उसकी पूरी जिम्मेदारियां उठाऊंगा एक बेटा होने का पूरा फर्ज निभा लूंगा बस आप ईशा को कुछ मत कहना जो कुछ भी हुआ उससे अनजाने में हुआ ।
बर्फी देवी ने मीत अलाहवत के सामने रखी एक दुविधा भरी शर्त …………
बर्फी देवी तो पहले से ही अहलावत परिवार से बदला लेना चाहती थी और अब तो उनका बेटा भी खत्म हो चुका है वह भी इलाहाबाद परिवार की बेटी के ईशा की गाड़ी से जोकि देव की पत्नी है इसी बात का फायदा उठाती है बर्फी देवी और मीत अलाहवत के सामने यह शर्त रखती है कि मैं तुम्हारी बहन ईशा को कुछ भी नहीं कहूंगी पर तुम्हें मेरी एक बात माननी पड़ेगी मीत कहता है कि अम्मा मैं तुम्हारी हर बात मानूंगा तुम जो कहोगी जैसा कहोगी वैसा करूंगा बर्फी देवी कहती है कि तुम्हें मेरी बेटी से शादी करनी पड़ेगी यह सुनकर मीत अलाहवत के होश उड़ जाते हैं क्या अपनी बहन ईशा की जिंदगी बचाने के लिए मीत बर्फी देवी की बेटी से शादी कर लेगा ।
उधर मंजरी मानुषी से अपना बच्चा लेने जाती है और मीत हुडा कि मां वहां आकर मंजरी से बोलती है कि तू ही मारी छोरी मीत है तू इस सच को झुठला नहीं सकती तू मुझे यह सच बता दे कि तू ही मारी बेटी मीत है कोई मंजरी नहीं यह सब सुनकर मानुषी को शक हो जाता है कि यह मंजरी नहीं उसकी बहन मीत हुड्डा है और वह बच्चे को लेकर भागने के लिए कहती है मीत हुडा का बच्चा कुणाल लेकर वहां से भाग रहा होता है परमीत अपनी पूरी ताकत से कुणाल और मानुषी का सामना करती है पर कुणाल उस बच्चे के पालने को पैर से धक्का दे देता है और बच्चे का पालना तेजी से ऊपर से नीचे की ओर गिरने लगता है मीत अपने बच्चे को बचाने के लिए क्या करेगी यह आपको आने वाले अगले एपिसोड के मैं आर्टिकल्स में दिखाया जाएगा क्या मीत अपने बच्चे को बचा पाएगी मीत अलाहवत और मीत हुडा के ऊपर और भी दुख के बादल छा जाएंगे एक तरफ बर्फी देवी द्वारा रखी हुई शर्तमीत अलाहवत के जिंदगी को पूरी तरह से बदलने वाला हैमीत अलाहवत अपनी बहन के लिए क्या दूसरी शादी कर लेगा या समय रहते मीत हुडा अपने परिवार को समेट लेगी क्या होने वाला है के एपिसोड में यह जानने के लिए आप कितने एक्साइटेड हैं हमें कमेंट में बताइए और हमारी आर्टिकल्स को पढ़ते रहिए।